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Akshaya Tritiya: आठ साल बाद अक्षय तृतीया पर मांगलिक उत्सव नहीं होगा; जानिए कब तक गुरु और शुक्र अस्त रहेंगे

वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस दिन मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी और दान-पुण्य का कार्य शुभ माना गया है। विशेषकर सोना खरीदना, सबसे ज्यादा शुभ होता है। अक्षय तृतीया पर स्वयंसिद्ध मुहूर्त होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं होती। आठ वर्ष बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब अक्षय तृतीया के दिन गुरु और शुक्र के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों पर पाबंदी रहेगी।

 

इसमें विवाह, गृह प्रवेश, नई वधू का गृह प्रवेश, जनेऊ व मुंडन शामिल हैं। इस दिन केवल अन्नप्राशन, नामकरण के साथ दुकान, वाहन, स्वर्ण और चांदी क्रय विक्रय हो सकता है। अक्षय तृतीया का मुहूर्त 10 मई को सुबह चार बजकर 17 मिनट से प्रारंभ होगा। वहीं, समापन 11 मई को सुबह दो बजकर 50 मिनट पर होगा।

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