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समय से पहले सख्त हो रही आर्टरीज, क्या यह हार्ट अटैक से पहले का सिग्नल?

भारत के कार्डियोलॉजिस्ट एक चिंताजनक ट्रेंड देख रहे हैं: कम उम्र के युवाओं की आर्टरीज समय से पहले बूढ़ी हो रही हैं। यानी जन्म प्रमाणपत्र में 35 साल दिख रहे हों, लेकिन शरीर के हार्ट और आर्टरीज की जांच में 50-55 साल जैसी स्थिति। डॉक्टर इसे “अर्ली वैस्कुलर एजिंग” कहते हैं।

क्रोनोलॉजिकल और बायोलॉजिकल एज में फर्क

  • क्रोनोलॉजिकल एज: आपकी वास्तविक उम्र।

  • बायोलॉजिकल एज: शरीर के अंग कितने स्वस्थ हैं।

डॉ. विवेक कुमार के अनुसार, लचीली आर्टरीज हर धड़कन के साथ फैलती-सिकुड़ती हैं और ब्लड फ्लो बनाए रखती हैं। लेकिन जब आर्टरीज सख्त और मोटी हो जाती हैं, तो बिना लक्षण के नुकसान जमा होने लगता है।

युवाओं की आर्टरीज बूढ़ी क्यों हो रही हैं?

  • आधुनिक जीवनशैली: लंबा बैठना, हाई-स्टेस जॉब, प्रोसेस्ड फूड।

  • नींद की कमी और तनाव।

  • धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर।

ICMR-INDIAB स्टडी के अनुसार, कम उम्र में डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं। WHO भी मानता है कि हार्ट रोग अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं।

इसे कैसे रोका जा सकता है?

  • रेगुलर एरोबिक एक्सरसाइज।

  • संतुलित आहार: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स।

  • पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान।

  • धूम्रपान छोड़ना।

डॉ. मुकेश गोयल कहते हैं: “असल सवाल यह नहीं कि आपकी उम्र कितनी है, बल्कि आपकी आर्टरीज कितनी स्वस्थ हैं।” सही जीवनशैली अपनाकर आर्टरीज की लचक सुधारी जा सकती है और हार्ट की बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।

नोट: यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई डाइट या एक्सरसाइज को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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