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“लड़कियों के लिए सतर्कता जरूरी: यह लापरवाही बन सकती है खतरनाक, जानें डॉक्टर की सलाह और बदलाव”

Common Health Problems In Adolescent Girls: माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को लेकर कहते हैं कि “अभी तो बच्ची है, अपने आप ठीक हो जाएगी.” यह सोच स्वाभाविक लग सकती है, लेकिन हकीकत यह है कि बचपन और किशोरावस्था सेहत के लिहाज से बेहद अहम दौर होते हैं. इसी उम्र में शरीर और दिमाग में होने वाले बदलाव आगे की पूरी जिंदगी को प्रभावित करते हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा किशोर भारत में हैं. दुनियाभर में किशोर आबादी कुल जनसंख्या का करीब 16 प्रतिशत है, यानी लगभग 1.2 अरब लोग. भारत में ही 25.3 करोड़ किशोर रहते हैं, जो देश की आबादी का करीब 20.9 प्रतिशत हैं.

बचपन में हो सकती है तमाम दिक्कत

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, बचपन से वयस्कता में जाने का यह दौर शारीरिक, मानसिक, हार्मोनल और सामाजिक स्तर पर बड़े बदलावों से भरा होता है. जहां यह उम्र विकास के कई मौके देती है, वहीं सेहत से जुड़े जोखिम भी इसी दौरान बढ़ते हैं. आम धारणा के विपरीत, किशोरावस्था कोई “बीमारी-मुक्त” उम्र नहीं है. इस दौरान पोषण की कमी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, कम उम्र में गर्भधारण, एचआईवी और यौन संचारित रोग, अन्य इंफेक्शन, हिंसा, दुर्घटनाएं और नशे जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार, कई गंभीर बीमारियों की जड़ें किशोरावस्था में ही होती हैं. इस उम्र में होने वाली कई मौतें रोकी जा सकती हैं या उनका इलाज संभव होता है. बावजूद इसके, कई किशोर जीवनभर चलने वाली बीमारियों या विकलांगता से जूझते रह जाते हैं. डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल करीब 13 लाख किशोर ऐसी बीमारियों से जान गंवाते हैं, जिनका इलाज या बचाव संभव है.

लड़कियों में बढ़ रही तेजी से समस्या

लड़कियों की सेहत को आज गंभीरता से लेने का मतलब है, आने वाले कल की कई परेशानियों को रोकना.  TOI से बात करते हुए डॉ. नीरज के. दीपक ने बताया कि, आज की किशोर लड़कियों में मोटापा, कुपोषण, कम उम्र में मेटाबॉलिक बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. बैठकर रहने वाली जीवनशैली, अनहेल्दी खान-पान, पढ़ाई का दबाव और जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम इसके बड़े कारण हैं. डॉक्टरों को अब कम उम्र में प्यूबर्टी शुरू होने और हार्मोनल गड़बड़ियों के मामले भी देखने को मिल रहे हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्याओं का रूप ले सकते हैं.

सही डाइट की कमी बीमारी की सबसे बड़ी वजह

पोषण को लेकर डॉक्टर बताते हैं कि सही डाइट की कमी इस समस्या की बड़ी वजह है. ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, शक्कर और कार्बोहाइड्रेट, जबकि फल-सब्जियों और प्रोटीन की कमी से मोटापा, एनीमिया और कमजोर इम्युनिटी जैसी दिक्कतें होती हैं. समय पर भोजन न करना और अनियमित खान-पान शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन पर भी असर डालता है. डॉक्टरों का कहना है कि बचपन में शारीरिक गतिविधियों की कमी आगे चलकर मोटापा, कमजोर हड्डियां, दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों, डायबिटीज और आर्थराइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है. इसलिए बच्चों के लिए रोजाना एक्सरसाइज और खेलकूद बेहद जरूरी है.

एक्सपर्ट बताते हैं   कि अगर बचपन से ही सही खान-पान, पर्याप्त नींद, नियमित एक्सरसाइज और सीमित स्क्रीन टाइम जैसी आदतें अपनाई जाएं, तो लड़कियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है. शुरुआती सावधानियां ही आगे की जिंदगी को बेहतर और सुरक्षित बना सकती हैं.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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